5000 करोड़ के राजस्व लक्ष्य को हासिल करने से चूका परिवहन विभाग
जयपुर। वित्त वर्ष 2018-19 समाप्त हो चुका है और राज्य सरकार के सबसे ज्यादा राजस्व जुटाने वाले विभागों के आंकड़े भी अब आ चुके हैं। परिवहन विभाग जो पिछले साल राजस्व लक्ष्य से आगे रहा था, इस बार पिछड़ गया है। राज्य सरकार ने परिवहन विभाग को 5000 करोड़ रुपए लाने का लक्ष्य दिया था और विभाग 4576 करोड़ रुपए ला सका है। ये रिपोर्ट देखिए और जानिए कि क्यों पिछड़ा परिवहन विभाग, ये भी समझिए कि राजस्व लाने के मामले में कौनसा आरटीओ है सबसे आगे। खास रिपोर्ट:
राज्य सरकार के लिए आय एकत्रित करने वाले विभागों में परिवहन विभाग का एक अपना महत्व है। पिछले वित्त वर्ष 2017-18 में परिवहन विभाग को 4300 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य दिया गया था और इसके विपरीत विभाग ने 4363 करोड़ रुपए अर्जित किए थे। यह लक्ष्य की तुलना में 101.44 फीसदी था। लेकिन इस बार परिवहन विभाग राजस्व लक्ष्य हासिल करने में पिछड़ गया है। राज्य सरकार की ओर से इस वित्त वर्ष के लिए परिवहन विभाग को 5000 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य दिया था। इसके विपरीत विभाग 4576.22 करोड़ रुपए जुटाने में कामयाब रहा है। यानी लक्ष्य का 91.52 फीसदी लक्ष्य विभाग ने हासिल किया है। पिछले साल जहां विभाग लक्ष्य से आगे निकल गया था, वहीं इस साल लक्ष्य से काफी पीछे रह गया है। हालांकि कुल राजस्व अर्जन की बात करें तो विभाग ने पिछले साल से 213 करोड़ रुपए ज्यादा अर्जित किए हैं। परिवहन विभाग की इस परफॉर्मेंस से राज्य सरकार नाखुश दिख रही है।
जानिए आरटीओ की रैंकिग:
रैंक आरटीओ कार्यालय लक्ष्य दिया अर्जित राजस्व
1 चित्तौड़गढ़ 358.48 करोड़ 342.19 करोड़
2 अलवर 287.90 करोड़ 269.21 करोड़
3 सीकर 370.85 करोड़ 346.56 करोड़
4 भरतपुर 191.82 करोड़ 177.20 करोड़
5 बीकानेर 385.44 करोड़ 350.17 करोड़
6 जोधपुर 499.76 करोड़ 449.37 करोड़
7 उदयपुर 471.65 करोड़ 422.54 करोड़
8 जयपुर 1020.98 करोड़ 905.85 करोड़
9 दौसा 154.14 करोड़ 136.62 करोड़
10 कोटा 324.20 करोड़ 284.66 करोड़
11 अजमेर 462.61 करोड़ 399 करोड़
12 पाली 272.17 करोड़ 233.91 करोड़
पिछले वित्त वर्ष से तुलना करें तो सर्वाधिक राजस्व लक्ष्य कोटा आरटीओ ने हासिल किया था, जो कि इस बार पिछड़कर दसवें स्थान पर गिर गया है। इस वित्त वर्ष में चित्तौड़गढ़ आरटीओ सबसे आगे रहा है। वर्तमान में चित्तौड़गढ़ आरटीओ की कमान संभालने वाली प्रवीणा चारण पिछले साल पाली में थी और तब यह चौथे स्थान पर रही थीं। वास्तव में प्रवीणा चारण की परफॉर्मेंस हमेशा बेहतर रहती आई है। इस बार अलवर रीजन में 3 आरटीओ लगने के बावजूद यह दूसरे नंबर पर रहा है। सीकर रीजन की आर्थिक हालत सुधारने के पीछे 6 महीने रहे ज्ञानदेव विश्वकर्मा और भरतपुर रीजन के लिए सतीश कुमार चौधरी को माना जा रहा है। क्योंकि इससे पिछले सालों में दोनों रीजन की आर्थिक स्थिति बहुत खराब रही है।
क्यों पिछड़ा परिवहन विभाग ?
—परिवहन अधिकारी कह रहे हैं कि इस वर्ष वाहनों की बिक्री कम हुई
—इससे टैक्स कम मिला, विभाग का राजस्व भी इससे गिरा
—पिछले साल लाइसेंस, पंजीयन की फीस बढ़ी थी, इससे विभाग लक्ष्य से आगे गया
—लेकिन इस बार फीस स्थिर रही, इसलिए अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई
—पिछले साल परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र अग्रवाल ने वाहवाही बटोरी थी
—लेकिन फीस बढ़ने की वजह से राजस्व खुद ही बढ़ गया था
—इस साल जनवरी तक यानी 10 माह के लिए परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र अग्रवाल ही थे
—लेकिन राजस्व केवल 90 फीसदी ही था
—इस वर्ष अंतिम 2 माह में राजेश यादव परिवहन आयुक्त के रूप में लगे
—जनवरी तक के राजस्व की तुलना में 1.50 फीसदी राजस्व बढ़ाया
—यदि उन्हें पहले लगाया जाता तो राजस्व और ज्यादा अर्जित हो सकता था
हालांकि लक्ष्य में पिछड़ने को लेकर परिवहन विभाग के अधिकारी कुछ भी कहें, लेकिन राजस्व लीकेज की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं उच्च स्तर पर अच्छे अधिकारी ही राजस्व में बढ़ोतरी कर सकते हैं, यह साबित कर दिखाया है नए परिवहन आयुक्त राजेश यादव ने। अब माना जा रहा है कि लक्ष्य में पिछड़ने वाले आरटीओ और डीटीओ अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। इस बात के संकेत परिवहन आयुक्त ने जॉइनिंग के दौरान ली गई मीटिंग में ही दे दिए थे। ऐसे में आगामी दिनों में देखना होगा कि कौंनसे आरटीओ या डीटीओ अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिरती है।
खुशवीर नायक
जयपुर राजस्थान


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